▪️पंडित धीरज मिश्र

दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धन, आरोग्य, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और परिवार पर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6:35 बजे से रात 8:35 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि दो घंटे है। प्रदोष काल शाम 6:03 बजे से रात 8:35 बजे तक रहेगा, जबकि वृषभ काल शाम 6:35 बजे से रात 8:35 बजे तक है।
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इस दिन यम दीपदान का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

- धनतेरस की पौराणिक कथा
धनतेरस से जुड़ी एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी भ्रमण की इच्छा जताई। भगवान विष्णु ने उनकी इच्छा स्वीकार करते हुए एक शर्त रखी कि वे दक्षिण दिशा की ओर नहीं देखेंगी और पृथ्वी के मोह-माया में नहीं उलझेंगी। माता लक्ष्मी ने यह वचन स्वीकार कर लिया।
पृथ्वी भ्रमण के दौरान माता लक्ष्मी का मन दक्षिण दिशा की सुंदरता देखकर विचलित हो गया। वहां सरसों के पीले फूलों और गन्ने के लहलहाते खेतों को देखकर वे आकर्षित हो गईं। उन्होंने सरसों के फूलों से स्वयं को सजाया और गन्ने का रस पीने लगीं। भगवान विष्णु को जब उनके वचन भंग करने का पता चला तो उन्होंने माता लक्ष्मी को प्रायश्चित्त स्वरूप 12 वर्ष तक एक निर्धन किसान के खेतों में रहने का आदेश दिया।
माता लक्ष्मी के आगमन से किसान के जीवन में सुख-समृद्धि आ गई और वह धनवान बन गया। 12 वर्ष पूरे होने पर जब भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को वापस वैकुंठ ले जाने पहुंचे तो किसान ने उन्हें विदा करने से मना कर दिया। तब माता लक्ष्मी ने प्रकट होकर किसान को पूरी बात बताई। उन्होंने वचन दिया कि वे प्रत्येक वर्ष दीपावली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को उसके घर आकर उसे आशीर्वाद देंगी।
इसी मान्यता के चलते धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदना भी मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस का संदेश केवल धन अर्जित करना नहीं, अपितु जीवन में स्वास्थ्य, संतोष और समृद्धि का संतुलन बनाए रखना भी है।
