● आंकड़ों में उभरता राजनीतिक परिदृश्य

■ अनिल गलगली (आरटीआई कार्यकर्ता)
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के 2025–26 के आम चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं और इन नतीजों ने मुंबई की राजनीति की स्पष्ट तस्वीर पेश की है। कुल 227 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने 89 सीटों पर जीत हासिल करते हुए कुल 11,79,273 वोट प्राप्त किए। यह कुल मतदान का 21.58 प्रतिशत है, जबकि सभी विजयी उम्मीदवारों को मिले कुल मतों में भाजपा की हिस्सेदारी 45.22 प्रतिशत रही।
दूसरे स्थान पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) रही। इस गुट ने 65 सीटों पर जीत दर्ज कर 7,17,736 वोट हासिल किए। कुल मतदान में इनका वोट शेयर 13.13 प्रतिशत और विजयी मतों में हिस्सा 27.52 प्रतिशत रहा।

वहीं पारंपरिक शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए 2,73,326 वोट प्राप्त किए। कुल मतदान में इनका हिस्सा 5 प्रतिशत रहा और विजयी मतों में 10.48 प्रतिशत योगदान रहा।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 24 सीटों पर सफलता पाई और उसे 2,42,646 वोट मिले। कांग्रेस का कुल मतदान में वोट शेयर 4.44 प्रतिशत और विजयी मतों में 9.31 प्रतिशत रहा।
अन्य दलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को 8 सीटें और 68,072 वोट प्राप्त हुए है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को 6 सीटें और 74,946 वोट प्राप्त हुए है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) को 3 सीटें और 24,691 वोट प्राप्त हुए है। समाजवादी पार्टी को 2 सीटें और 15,162 वोट प्राप्त हुए है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) को सीट 1 और 11,760 वोट प्राप्त हुए है। कुल मिलाकर 227 विजयी उम्मीदवारों को 26,07,612 वोट मिले, जो कुल मतदान का 47.72 प्रतिशत है। पूरे मुंबई में कुल मतदान 54,64,412 दर्ज किया गया, जबकि 11,677 वोट अमान्य (रद्द) घोषित किए गए।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मुंबई महानगरपालिका में बहुदलीय राजनीति बनी हुई है, लेकिन भाजपा का प्रभाव उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। शिवसेना के दोनों गुटों की संयुक्त ताकत अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, जबकि कांग्रेस और अन्य छोटे दल संख्या में कम होने के बावजूद सत्ता संतुलन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। मुंबई के मतदाताओं द्वारा दिया गया यह जनादेश आने वाले समय में मनपा की सत्ता-समीकरण, विकास योजनाओं और प्रशासनिक दिशा को तय करने वाला साबित होगा।
