■ 80 हजार करोड़ के बजट से बदलेगी मुंबई की रफ्तार
■ पिछले वर्ष की तुलना में 8.77 प्रतिशत अधिक

● मुंबई
देश की सबसे संपन्न महानगरपालिका मुंबई मनपा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 80,952.56 करोड़ रुपये का महाबजट पेश कर विकास की नई रूपरेखा सामने रख दी है। मनपा आयुक्त भूषण गगरानी ने स्थायी समिति के समक्ष यह बजट प्रस्तुत किया, जो पिछले वर्ष के 74,427 करोड़ रुपये की तुलना में 8.77 प्रतिशत अधिक है। चार वर्षों के अंतराल के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों और नई सत्ता की उपस्थिति में पेश हुआ यह बजट राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
इस बार बजट का केंद्र बिंदु बीएमसी की सावधि जमा (एफडी) है। नगर निगम के पास कुल 81,449.32 करोड़ रुपये की एफडी जमा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इनमें से 36,623.09 करोड़ रुपये विभिन्न अहम आधारभूत परियोजनाओं को पूरा करने के लिए निकाले जाएंगे। शेष 44,826 करोड़ रुपये विभिन्न अनिवार्य दायित्वों के लिए सुरक्षित रहेंगे। यानी विकास को गति देने के लिए जमा पूंजी का नियंत्रित उपयोग किया जाएगा।
एफडी के इस्तेमाल को लेकर सियासत भी तेज होने की संभावना है। विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पहले ही आशंका जता चुका था कि सत्ता परिवर्तन के बाद नगर निगम की जमा पूंजी का उपयोग नए सत्ताधारी करेंगे। अब बजट में बड़े पैमाने पर एफडी से धन निकालने की घोषणा ने इस बहस को और धार दे दी है। प्रशासन का पक्ष है कि लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वस्तरीय स्वरूप देने पर इस बजट में विशेष बल दिया गया है। वर्सोवा-दहिसर तटीय संपर्क मार्ग के लिए 4,000 करोड़ रुपये तथा गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के लिए 2,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की धुरी मानी जाने वाली BEST बस सेवा को संबल देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की सहायता तय की गई है।
स्पष्ट है कि यह बजट केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि विकास की रफ्तार बढ़ाने की रणनीति है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि घोषित परियोजनाएं जमीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से उतरती हैं।
