■ ‘अहंकार की लड़ाई’ पर हाईकोर्ट सख्त

● मुंबई
मुंबई से एक असाधारण न्यायिक निर्णय सामने आया है, जहां बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई 20 वर्ष बाद तय कर दी। अदालत ने इस पूरे विवाद को “अहंकार की लड़ाई” करार देते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे मामले न्यायिक समय की अनावश्यक बर्बादी हैं।
मंगलवार को जस्टिस जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने 90 वर्षीय तारिणीबेन और 57 वर्षीय ध्वनि देसाई से जुड़े इस प्रकरण की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के निजी विवाद न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और गंभीर मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले की अगली सुनवाई अब वर्ष 2046 के बाद ही की जाएगी, जो अपने आप में एक दुर्लभ निर्णय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2017 में दायर एक मानहानि याचिका से जुड़ा है, जिसमें तारिणीबेन और ध्वनि देसाई ने किलकिलाराज भंसाली समेत अन्य लोगों के खिलाफ 20 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी। उनका आरोप था कि वर्ष 2015 में सोसायटी की वार्षिक बैठक के दौरान हुई घटना से उन्हें मानसिक पीड़ा और सार्वजनिक अपमान झेलना पड़ा।
अदालत की इस टिप्पणी और फैसले ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायपालिका अब ऐसे मामलों पर कड़ा रुख अपनाने के मूड में है, जो केवल व्यक्तिगत टकराव का परिणाम हैं और जिनसे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है।
